जैविक मैन के नाम से विख्यात पूर्व राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा के देहरादून फ़ार्म से निकला 5kg का एक मूली

जैविक मैन के नाम से विख्यात पूर्व राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा के देहरादून फ़ार्म से निकला 5kg का एक मूली
जैविक मैन के नाम से विख्यात पूर्व राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा के देहरादून फ़ार्म से निकला 5kg का एक मूली

“जैविक मैन’ के नाम से विख्यात पूर्व राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा के देहरादून फ़ार्म से निकला 5 kg का एक मूली,

आज आरके सिन्हा अपने देहरादून फार्म पहुँचे। वहाँ आलू के खेत से आलू निकाला जा रहा था। सभी उसी में व्यस्त थे। खेत में घूमते हुये आद्या ॲार्गेनिक की निदेशक श्रीमती रत्ना सिन्हा की निगाह हरियाली में छिपे एक विशालकाय मूली पर पडी। इस मूली को निकालने पर इसका वजन 4.468 निकला। आरके सिन्हा ने कहा की रसायन रहित होने के कारण मूली स्वाभाविक रूप से मुलायम और स्वादिष्ट था। कौन कहता है कि जैविक कृषि में उत्पाद कम हो जाता है,

जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए भाजपा के पूर्व राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा हमेशा किसानों से मिलकर उन्हें प्रेरित करते रहते है। पहले उन्होंने कई जगहों पर अभियान के तहत जैविक खेती के कार्य की शुरुआत कर दी है।

उन्होंने सबसे पहले अपने गांव बहियारा से शुरुआत करते हुये नोएडा व देहरादून में खेती प्रारंभ किया । आपको बताते चले की केंद्र सरकार भी जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक पद्धतियों को अपना रही है। इसके साथ-साथ प्राकृतिक खेती के साथ ही आधुनिक खेती कर किसानों की खेती से आमदनी बढ़ाने की दिशा में लगातार काम भी कर रही है। ‘जैविक मैन’ के नाम से विख्यात आरके सिन्हा ने कहा कि जैविक तरीके से कुछ भी उगाई जाए तो बाजार के सामान्य मूल्य से दोगुना मूल्य में सामान बिकेगा।

उन्होंने कहा कि पाश्चात्य कृषि वैज्ञानिकों की यह धारणा रही है कि जमीन में कुछ है ही नहीं, डालोगे नहीं तो कुछ होगा ही नही। इस धारणा को उन्होंने नाकारते हुए कहा कि प्राकृतिक ढंग से जो काम करेंगे उसमें प्रकृति सहायता करेगी। रासायनिक खाद डालकर पहले तो किसान सारे जीवाणु को मार देते हैं, जो बच गए वो जमीन में 15 से 20 फीट नीचे चले जाते हैं।

लोगों का मानना है कि खेती को और ऊपजाऊ बनाने के लिए यूरिया और डाली जाए, खाद और ज्यादा डाली जाए। इस पद्धति को सिरे से खारिज करते हुए श्री सिन्हा ने बताया कि रासायनिक खाद एवं रासायनिक कीट नाशकों का प्रयोग बंद करें और वापस प्राकृतिक कृषि पर लौटें तब पता चलेगा की हमारी प्रकृतिक खेती कितनी उन्नत और उम्दा है।

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